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जस्तो सुकै PDF फरम्याट को फाइललाई कसरी EDITABLE फाइल बनाउने आउनुहोस् जानौँ !

हिन्दी भाषा न बुझ्ने साथीहरु ले आफुले चाहेको भाषामा पनि तलको सामाग्री हेर्न सक्नु हुन्छ !!!!

Soft-Copy
मान लीजिए आपके पास 10-12 पेज का कोई लेख है, जो पेपर पर लिखा है और आपको उसकी सॉफ्ट कॉपी चाहिए। ऐसे में क्या आप 10-12 पेज दोबारा टाइप करने बैठेंगे? नहीं, यह काम आप अपने गूगल ड्राइव के जरिये कर सकते हैं।
कम लोगों को यह जानकारी है कि जब वे किसी अच्छे ब्रैंड का स्कैनर या फिर एमएफडी (मल्टी फंक्शनल डिवाइस) खरीदते हैं तो उसके साथ एक सॉफ्टवेयर भी मिलता है, जिसका नाम है- ऑप्टिकल कैरक्टर रेकग्निशन (ओसीआर)। आमतौर पर हम स्कैन किए जाने वाले दस्तावेजों को इमेज या पीडीएफ फॉर्मैट में कंप्यूटर में सहेजते हैं, लेकिन ओसीआर सॉफ्टवेयर की मदद से उन्हें टेक्स्ट फॉर्मैट में भी स्टोर किया जा सकता है। ये दस्तावेज थोड़े-बहुत संशोधनों के बाद उसी तरह इस्तेमाल किए जा सकते हैं जैसे आपने उन्हें कंप्यूटर में खुद टाइप किया हो। बाकायदा एडिटिंग कीजिए, काटिए, जोड़िए, कहीं भी पेस्ट कीजिए। पूरी तरह से एक टेक्स्ट फाइल की तरह से इन्हें आसानी से यूज किया जा सकता है।

वैसे यह सेवा ऑनलाइन भी उपलब्ध हैं। अच्छी बात यह है कि ऑनलाइन यह सेवा सिर्फ अंग्रेजी ही नहीं बल्कि हिंदी और दूसरी तमाम भाषाओं में भी मिलती है। इसी की बदौलत गूगल और दूसरी ऑनलाइन पुस्तक सेवाएं लाखों किताबों को डिजिटल रूप में परिवर्तित करती हैं। अगर ऐसा हो रहा है तो फिर भला आप इस सुविधा का फायदा क्यों नहीं उठाते?
गूगल ड्राइव के जरिए OCR
हालांकि स्कैनर और एमएफडी के साथ आमतौर पर आपको एक अलग ओसीआर सॉफ्टवेयर मिलता है, जिसका इस्तेमाल डॉक्युमेंट स्कैन करते समय किया जा सकता है, लेकिन ऐसे कंप्यूटर यूजर्स की संख्या बहुत कम है, जिनके पास स्कैनर या एमएफडी हों। वैसे भी कुछ सस्ते स्कैनर और एमएफडी के साथ ओसीआर सॉफ्टवेयर नहीं मिलता। ऐसे यूज़र्स इंटरनेट के जरिए उपलब्ध गूगल की ओसीआर सेवा का इस्तेमाल कर सकते हैं, जो उसकी दूसरी सेवाओं की ही तरह मुफ्त है और इस्तेमाल में आसान। पहले यह सेवा गूगल डॉक्स का हिस्सा हुआ करती थी लेकिन अब डॉक्स और ड्राइव दोनों को एक ही प्लैटफॉर्म में समाहित कर दिया गया है।

गूगल के वेब ओसीआर का इस्तेमाल करने के लिए आपके पास गूगल का अकाउंट होना चाहिए। दूसरी जरूरत ऐसे दस्तावेज की है, जिसे स्कैन किया गया हो। याद रहे, गूगल ड्राइव की यह सुविधा हिंदी की फाइल को बदलती तो है, लेकिन सारा मटीरियल गड़बड़ हो जाता है। सभी शब्द उलट-पुलट हो जाते हैं जिन्हें ठीक करना पड़ता है।

गूगल ओसीआर का इस्तेमाल करने के लिए यह प्रोसेस अपनाएं :
1. drive.google.com पर लॉगिन करें।
2. अब खुलने वाले पेज पर आपकी वे सभी फाइलें दिखाई जाएंगी, जिन्हें आपने कभी गूगल ड्राइव पर अपलोड किया होगा। यदि वहां कोई फाइल नहीं दिख रही तो इसका मतलब है- आपने अब तक कोई फाइल अपलोड नहीं की है।
3. सबसे पहले गूगल ड्राइव वेब पेज के राइट साइड में Settings वाले आइकन को क्लिक करें और वहां दिखने वाले विकल्पों में Upload Settings पर क्लिक करें।

4. अब एक और मेन्यू खुलेगा, जिसमें Convert Text from uploaded PDF and Image files पर क्लिक कर उसे सलेक्ट कर लें।

5. अब गूगल के मुख्य लोगो (ऊपर लेफ्ट में) के पड़ोस में अपलोड बटन पर जाएं।

6. इसे क्लिक करने पर फाइलों को अपलोड करने के लिए एक छोटा सा मेन्यू उभरेगा, जिसमें Files पर क्लिक करें।

7. अब फाइल अपलोड करने वाला डायलॉग बॉक्स खुलेगा, जिसके जरिए आप अपने कंप्यूटर में मौजूद पीडीएफ या इमेज फाइल को, जो स्कैन की गई है या फिर किसी अन्य स्रोत से हासिल की गई है, अपलोड कर दें।

8. फाइल अपलोड होने की प्रक्रिया दिखाने वाला बॉक्स खुलेगा, जिसमें अपलोड की प्रॉसेस दिखेगी। प्रॉसेस पूरी होने पर Upload Complete का संदेश दिखाई देगा।
9. फाइल अपलोड होने के बाद आपकी फाइलों की सूची में दिखाई देगी।
10. चूंकि आपने शुरुआत में ही गूगल ड्राइव को निर्देश दे दिया था कि इस दस्तावेज को टेक्स्ट फॉर्मैट में बदलना है, सो यह दस्तावेज अब अपने बदले हुए फॉर्मैट में डाउनलोड किए जाने के लिए तैयार है।
11. अब हम इसी फाइल को पीडीएफ नहीं बल्कि टेक्स्ट फॉर्मैट में डाउनलोड करेंगे। इसके लिए फाइल को सिलेक्ट करें और ऊपर More मेन्यू पर क्लिक करें। यहां नीचे की ओर Download विकल्प दिखाई देगा। इसे क्लिक करें।
12. फाइल डाउनलोड होने से पहले Convert And Download डायलॉग बॉक्स सामने आएगा, जिसमें आप दस्तावेज को किस रूप में डाउनलोड करना चाहते हैं, उसके विकल्प दिखाए जाएंगे। आप देख सकते हैं कि यहां पर HTML, Plain Text, Microsoft Word Document आदि विकल्प हैं। इनमें से माइक्रोसॉफ्ट वर्ड या प्लेन टेक्स्ट विकल्प को चुनें और दस्तावेज को डाउनलोड कर लें।
13. अब अपने दस्तावेज को संबंधित टेक्स्ट एडिटर, माइक्रोसॉफ्ट वर्ड या नोटपैड आदि में खोलकर देखें। पीडीएफ या इमेज दस्तावेज का मैटर टाइप किए गए मैटर में तब्दील हो चुका है।

याद रहे, गूगल ड्राइव की यह सुविधा फिलहाल हिंदी और अन्य भारतीय भाषाओं में उपलब्ध नहीं है। हिंदी में यही काम कैसे हो, यह हम कुछ समय बाद बताएंगे।

लौ बर्बाद भयो "फेसबुक च्याट बन्द हुने रे"

केहि दिन पछि फेसबुक ऐप बाटै च्याटिङको गर्न नपाइने भएको छ । फेसबुकले मेसेन्जर ऐपको लागी विश्व व्यापिकरण गर्नका लागी फेसबुक ऐपबाट च्याटिङको सुविधा हटाउन लागेको हो ।



फेसबुकबाटै च्याटिङ गर्नका लागी मेसेन्जर ऐपको प्रयोग गर्नुपर्ने हुने छ । फेसबुकले केहि दिनमा नै मेसेन्जर प्रयोग गर्ने अन्राष्ट्रिय सन्चार माध्यमले जनाएका छन् ।
यस बिषयमा एउटा अनलाइन पत्रीकाले के लेख्यो जस्ताको तस्तै

Facebook on Monday announced it will be drawing down support for messages sent through its flagship mobile app, meaning users around the world will be forced to download the standalone Messenger app if they want to take their chats on the road.
After seeing success in a Messenger-only pilot program in Europe, Facebook will in the coming days remove chat capabilities from its main app and require iOS and Android device users to rely on the standalone messaging software for such services, reports Tech Crunch.
"In the next few days, we're continuing to notify more people that if they want to send and receive Facebook messages, they'll need to download the Messenger app. As we've said, our goal is to focus development efforts on making Messenger the best mobile messaging experience possible and avoid the confusion of having separate Facebook mobile messaging experiences. Messenger is used by more than 200 million people every month, and we'll keep working to make it an even more engaging way to connect with people."
According to the publication, Facebook claims Messenger is 20 percent faster than sending and receiving messages through the main Facebook mobile app. Breaking out chat services to a standalone app will remove bloat from the flagship, while boosting user share for Messenger. While streamlining apps may win the favor of some users, others might take unkindly to the change, especially those who use Chat Heads to multitask while in the flagship Facebook app.

Most recently, Facebook took its Messenger app universal with a new version optimized for the iPad.

For those looking to download Messenger before the new policy goes into effect, the app is available as a free 39MB download from the App Store.


Update: An earlier version of this article incorrectly stated Windows Phone devices will also be affected by the change in Messenger policy. Facebook is planning the drawdown in support for iOS and Android devices only. The article has been updated to reflect this information.
source: agency 

कुनै पनि कम्प्युटर मा BLOCKED वेबसाइटहरु खोल्ने केहि तरीकाहरु

       स्कुल कलेज वा अफिसका कम्प्युटर हरु जुन आईटि नियन्त्रणमा हुन्छन जहाँ तपाईँहरुले पनि कयौ पटक आफुलाइ मन पर्ने सोसियल नेटवोर्किङ साईट (फेसबुकट्विटरगूगल प्लस) खोल्ने प्रयास पक्कै गर्नुभएको होला । अथवा भिडियो हेर्न वा डाउनलोडगर्न युटुब वा टोरेन्ट पनि खोल्ने प्रयास गर्नुभयो होला । तर एडमिनिस्ट्रेशन द्वारा यस्ता साइटहरु जुन स्कुल कलेज वा कार्यालयको मर्यादा वा नियम बिपरीत छन् सबै बन्द गराइएका हुन्छन।
TIPS: ऐसे किसी भी कम्प्यूटर पर खोलें ब्लॉक की गई वेबसाइट्स
      यो प्रकिया वहाँ कामगर्ने ब्यक्तिहरुका लागि तनावको बिषयपनि बनेको हुन सक्छ ।यस्ता केही तरीकाहरु छन् जसको सहयोग द्वारा कम्प्युटरमा ब्लक गरीएका वेबसाईटहरु खोल्न सकिन्छ ।आउनुहोस केहि सरल तरीकाहरुको बारेमा जानौँ ।
१. वेबसाइटको IP ऐड्रेस  को मद्दतले
     वेबसाइटको  IP  ऐड्रेस  को मद्दतले केही वेबसाइटहरु कम्प्युटरमा अनब्लक गर्न सकिन्छ । प्रायजसो कुनैपनि वेबसाईटलाइ ब्लक गर्नको लागि उक्त वेबसाइटको युआरएल को प्रयोग गर्ने गरिन्छ  यस्तो अबस्थामा त्यस्ताखाले वेबसाइटहरु खोल्नका लागि उक्त वेबसाइटको IP ऐड्रेस को प्रयोग गर्न सकिन्छ ।
स्टेप १- सबैभन्दा पहिले आफ्नो कम्प्युटरको स्टार्ट मेनुमा गएर "रन" सेलेक्ट गर्नु ,
स्टेप २- अब रन कमांन्ड बक्समा "cmd" टाईप गरि इन्टर थिच्नुहोस ,


स्टेप ३- त्यसपछि तपाईको कम्प्युटर स्क्रिनमा माथि देखाएजस्तो कालो रङकोकमान्ड विंडो खुल्ने छ।
स्टेप ४-अब कमांड विंडो मा तपाईँले खोल्न चाहेको वेबसाईटको "URL" टाइप गर्नुहोस। उदाहरणको लागि फेसबुक खोल्न चाहानुभएको भएअ- www.facebook.comफेसबुकको "URL" हो ।तर हामिले ध्यान दिनुपर्ने कुरा के छ भने, तपाईंले खोल्न चाकेको वेबसाईटको अगाडि "ping"टाईप गर्नुपर्छ । उदाहरणको लागी "ping www.facebook.com"यो तरीकाले टाइप गरीसकेपछी इन्टर बटन थिच्न नभुल्नुहोला ।
स्टेप ५- पिंग कमांड टाइपगरेर इन्टर थिच्ने बित्तिकै तपाइको कम्प्युटर स्क्रिनमा उक्त वेबसाइटको IP ADDRESS देखिन थाल्छ । जुन यस्तो "173.194.35.114" फर्मेटमा हुन्छ तर अङ्कहरु परक फरक हुन सक्छन् ।
स्टेप ६- अब माथि दीइएको जस्तै IP address को फर्मेटको लाइ आफ्नो कम्प्युटरको ब्राउजर खोलेर address bar मा टाइप गर्नुहोस । इन्टर बटन थिच्नुहोस वेबसाइट खुल्न सक्छ जुन सामान्य अबस्थामा ब्लक हुन्थ्यो ।
तरीका नं-०२"URL address छोटो बनाएर "
जानकारिको लागि अघिल्लो तरिका कमांड प्रॉम्प्ट मा वेबसाइटको URL ब्लक नभएको अबस्थामा मात्र काम गर्छ ।यदी कमांड प्रॉम्प्ट मा वेबसाइटको URL ब्लक भएको अबस्थामा यो नयाँ तरीका अपनाउन सकिन्छ ।
स्टेप १- सबैभन्दा पहीले इन्टरनेट ब्राउजर खोलेर तल दीइएका मध्य कुनै एक साइट खोल्नुहोस ।
   http://goo.gl
   https://bitly.com
त्यस पछि वेब ब्राउजरमा यस्तो देखिन्छ ।
block site

स्टेप २- अब माथि देखिए जस्तै सर्च बक्समा तपाईंले खोल्न चाहेको वेबसाइटको URL टाइप गरेर इन्टर बटन थिच्नुहोस ।त्यसपछि तपाइको वेबसाइट URL छोटो फर्मेटमा देखिने छ ।
स्टेप ३- अब उक्त छोटो URL लाइ आफ्नो कम्प्युटरको वेब ब्राउजरमा लगेर पेस्ट गरि इन्टर बटन थिच्नुहोस वेबसाइट खुल्न सक्छ ।
                                            तरीका नं-०३ प्रॉक्सी (proxy) सर्वरको मद्दतले
Add caption
हरेस नखानुहोस तरीका नम्बर २ पनि काम नगरेको अबस्थामा तपाईंलाइ यो तरिका उपयोगि हुन सक्छ ।
स्टेप १- गूगल क्रोम ब्राउजर खोल्नुहोस
स्टोप - Settings > Advance settings >Show advance settingsमा क्लिक गर्नुहोस माथि देखाएजस्तो फर्मेट खुल्छ
स्टेप ३-  ‘Show advance settings ’) ऑप्शनमा क्लिक गर्नुहोस , तलको जस्तो बक्स खुल्छ ।
स्टेप ४-अब माथि देखाईएको क्रमानुसार LAN setting मा क्लिक गर्नुहोस दाँया साइडको जस्तो बक्स खुल्नेछ ।
स्टेप ५-अब यहां ‘Use Proxy Server for your LAN’ अप्सनको चेकबक्समा क्लिक गर्नुहोस 
स्टेप चित्रमा देखाएजस्तै आफुले खोल्न चाहेको वेबसाइट "URL"ऐड्रेस फील्डमा टाइप गर्नुहोस
स्टेप ७- पोर्ट नंबरको ठाउँमा"80" टाइप गरेर"ok" बटन क्लिक गर्नुहोस ।अब ब्लक साइट खुल्छ ।
                                                   तरीका नं-०४ ultrasurf टूलको मद्दतले

ultrasurf सॉफ्टवेयर धेरै ब्लक वेबसाइटहरु खोल्न सक्ने टुल हो । जुन आज भोलि निकै लोकप्रिय पनि छ।
यसको प्रयोग गर्नको लागि
स्टेप १-सबै भन्दा पहिलेultrasurf टुल डाउनलोड गर्नुहोस ।डाउनलोड गरेको पाइललाइ अनजिप गरी आफ्नो कम्प्युटरमा इन्सटल गर्नुहोस ।जो विन्डोज खुल्छ त्यस्लाइ मिनिमाइज गर्नुहोस इन्स्टल गरीसकेपछि तपाईँको कम्प्युटरको वेब ब्राउजरमा पहिले ब्लक भएका साईटहरु खुल्न थाल्ने छन ।

माथिका तरीकाहरु केबल सहि सदुपयोग गर्नको लागि मात्र दीइएको हो ।


नदेखिने नम्बरबाट फोन आएर दुख दियो ? यसो गर्नुस्

यदि तपाइँलाई कसैले नदेखिने नम्बर अर्थात अननोन नम्बरबाट फोन गरेर हैरान पारेको छ भने चिन्ता नगर्नुस् । नम्बर पत्ता लगाउने तरिका कठिन छैन । स्मार्ट फोनको आजको युगमा एप्सको कमि छैन । प्राइभेट कलर वा नदेखिने नम्बर पत्ता लगाउन कुनै ट्रिक जरुरी छैन यसलाई इन्टरेनेटमा पाइने सफ्टवेयर र एप्स भए पुग्छ । एन्ड्रोइड र ios दुवै अपरेटिङ सिष्टममा युजर्सलाई यस्ता एप्स सहजै पाहिन्छ ।   यहाँ नदेखिने नम्बर पत्ता लगाउने ५ एप्सको जानकारी प्रस्तुत गरिएको छ ।
unknown caller
MOBILE NUMBER LOCATOR मोबाइल नम्बर लोकेटर नामको यो ऐप भारत, नेपाल, अमेरिका र कनाडा लगायतका क्षेत्रमा काम गर्छ । यदि कसैले अननोन नम्बरबाट फोन गर्यो भने यो एप डाउनलोड गर्यो भने यसले टेलिकमको जानकारी र सबै डाटा पत्ता लगाइदिन सक्छ । नम्बर लोकेट गरेपछि यसले गूगल म्यापको सहयोगले स्थान पनि पत्ता लगाइदिन्छ भने यो एपले कुन शहर वा राज्यबाट फोन गरेको समेत बताइदिन्छ । यसको सबै भन्दा राम्रो गुण बिना इन्टरनेट समेत काम गर्छ । यो एपले देखाइरहेको जानकारी हटाउन मन लागे अफ बटन थिच्न सकिन्छ त्यसो गर्दा पनि फोन भने कट्दैन । 
unknown caller 1
TRUE CALLER यो हाल सम्मकै सबै भन्दा बढी मोबाइल नम्बरको डाटाबेस रहेको दावी गर्ने एप्स हो । यसबाट जुनसुकै देशको नम्बर पनि पत्ता लगाउन सकिन्छ । यो प्रयोग गर्न इन्टेरनेट चाहिन्छ तर इन्टरनेट भए जहाँबाट गरेको नम्बरको पनि सबै जानकारी स्क्रिनमा देखिन्छ । फोन उठाउनु अघि नै कहाँबाट कस्ले गरेको फोन भन्ने कुरा थाहा पाउन यो एप्सले मद्दत गर्छ । त्यतिमात्र होइन ब्लफ कलहरु ब्लक गर्ने सुविधा पनि यसले दिएको छ ।
line whose call
LINE whoscall- Caller ID&Block
लाइन कर्पोरेशनले बनाएको यो एप्सले कल डिटेल्स पत्ता लगाउन मद्दत गर्नुका साथै नचाहिने कल ब्लक गर्न पनि सहयोग गर्छ । यसको निर्माता TechCrunch ले रेटिङमा स्पाम कल्सबाट प्रयोगकर्तालाई छुट दिने भनेको छ । यसमा कलर आइडेन्टिफिकेसन सुविधा छ भने युजरले दिएको जानकारी सबै डिस्प्ले देखिन्छ । यो एप्स राखिसकेपछि फोन आउँदा कलरको नम्बर डिटेल्स र अन्य रिपोर्ट समेत देखिन्छ । त्यसैगरी यसले ब्लफ कल र एसएमएस पनि ब्लक गरिदिन्छ । यो एप्सले गुगल प्लेमा दिएको जानकारी अनुसार ६० करोड फोन नम्बर छन् ।

Calls Blacklist
यो एप्स पनि अननोन नम्बरले दुख दिएकाहरुका लागि सहयोगी हुन सक्छ । यसले पनि स्मार्टफोनमा आएका ब्लफ कल र एसएमएस ब्लक गर्न सक्छ । यसमा कुनै पनि नम्बरबाट आएका कल वा एसएमएस ब्लक गर्नका लागि लिष्ट नै बनाउन सकिन्छ । वा कुनै नम्बरको जानकारी चाहिए पनि यसमा लिष्ट गरिदिएपछि कल वा एसएमएस आउँदा जानकारी समेत आउँछ ।
call block list

TalkSide यो पनि गोप्य नम्बर पत्ता लगाउनका लागि चर्चित एप्स हो । यसमा फोन गर्ने ब्यक्तिको फेसबुक र अन्य सामाजिक सञ्जालमा भएका जानकारी समेत उपलब्ध गराइदिन्छ । यसले कलर सम्बन्धी सबै डाटाबेस स्क्रिनमा देखाउँछ । यसले पनि सामाजिक सञ्जालमा नोटिफिकेसन दिन्छ र इनकमिङ र आउट गोइङ कल्सको रेकर्ड समेत राखिदिन्छ ।
talk side
source:http://nepaliheadlines.com/2014-07-05-07-34-55.html

अब स्मार्ट होम

घर पनि स्मार्ट ? मोबाइल, टिभी, घडीलगायतका डिभाइस स्मार्ट भइरहेका बेला घर मात्र कसरी अछुतो रहला र ! घरलाई स्मार्ट बनाउने प्रविधिको विकास गरेका छन् इलेक्टि्रकल, इलेक्ट्रोनिक्स र कम्प्युटरका विद्यार्थीले ।



तपाईं बिहान मिटिङमा जानु भएको छ । मिटिङ सकिन ढिला भयो । घर फर्केर अफिस जानु पर्ने । खाना पकाउनै छ । चिन्ता नलिनुस् । बिहानै चामल भिजाइओरी राइसकुकर बिजुलीको प्लगमा जोडेर छाड्नुस् । लाइन भने अफ राख्नुस् । मिटिङबाट निस्कनुअघि मोबाइलबाटै राइसकुकर अन गर्ने अर्डर गर्नुस् । घर पुग्दा खाना पाकिराखेको हुन्छ । खानुस्, कार्यालय जानुस् ।

ट्यांकीमा पानी सकिएको छ । लाइन दिउँसो २ बजे आउँछ । त्यतिखेर तपाईं अफिसमा हुनुहुन्छ । कार्यालय बिदा लिएर आउनु कि पानी तान्ने मोटर जोडेर छाड्नु ? दुवै कुरा तपाईंका लागि असंभवजस्तै छ । पख्नुस् । कार्यालयबाटै मोटर चलाएर ट्यांकी भर्न सक्नु हुन्छ ।

घरबाट निस्कँदा वत्ती, फ्यान अफ गर्न बिर्सनु भयो ? फर्केर आउन तत्काल असम्भव होला ? साँझ घर र्फकन ढिला भयो । घरमा बत्ती बाल्नु पर्ने । यस्ता समस्या हरेक घरले भोगेको हुन्छ । ती सबै कुराको समाधान छ नेशनल कलेज अफ इन्जिनियरिङका केही प्रमोद खड्का र समिरा शर्माको स्मार्ट होम प्रोजेक्टमा ।

मोबाइलमा एउटा एप्स डाउनलोड गर्नुस् । घरमा माइक्रो कन्ट्रोलरसँग आवश्यक स्वीचलाई कनेक्ट गर्नुस् । त्यस कन्ट्रोलरसँग इन्टरनेट भने जोडिएको हुनु पर्छ । त्यसपछि मोबाइलमा भएको एप्सबाट गरिएको अर्डर अनुसार कन्ट्रोलरले सबै डिभाइसमा बिजुली अन/अफ गरिदिन्छ । 'घरबाहिरै रहेर घरमा भएका सबै विद्युतीय सामग्री मोबाइलबाटै नियन्त्रण गर्ने गरी प्रविधि विकास गरेका हौं,' खड्काले भने, 'यसलाई हरेक घरमा प्रयोगमा ल्याउँदा, समय, श्रम र खर्चको बचत हुन्छ ।' स्मार्ट फोन नहुनेले कम्प्युटरबाटै घरका इलेक्ट्रोनिक्स नियन्त्रण गर्न सकिने गरी उनीहरूले वेव पेजको डिजाइनसमेत गरेका छन् ।

पुल्चोक इन्जिनियरिङ कलेजका इलेक्टि्रकल, कम्प्युटर र इलेक्ट्रोनिक्स डिपार्टमेन्टमा अध्ययनरत विद्यार्थीले हरेक बर्ष आयोजना गर्ने प्रविधि मेला (लोकस) मा ती दुईको प्रोजेक्ट अरु विद्यार्थीसँग प्रतिस्पर्धा गर्दै थियो । आयोजकले यस बर्षको मेलाको थिम दिएका थिए 'घरघरमा प्रविधि ।'

थिम अनुसार आफ्नो इन्नोभेसन पस्किएका थिए काठमाडौं इन्जिनियरिङ कलेजका अभिषेक महर्जन, विजयकुमार थिङ, प्रदीप महर्जन, शतीष बज्राचार्य र राहुल बज्राचार्यको समूहले पनि । उनीहरूको प्रोजेक्ट होम अटोमेसनले इन्टरनेटमार्फत मोबाइल/कम्प्युटरबाट घरमा रहेका विद्युतीय सामग्री चलाउने सुविधा दिन्छ नै । यस अतिरिक्त घरको सुरक्षामा समेत सघाउँछ ।

'हामीले मोबाइलबाटै घरको ढोका खोल्ने प्रविधि विकास गरेका छौं,' थिङले भने, 'आफू  घरबाहिर बस्दा कोही घरमा आए उसको भिडियो खिचेर घरधनीलाई पठाउने व्यवस्थासमेत यसमा छ ।' सिंहदरबारलगायत ठूलो कम्पाउन्ड भएका भवनमा अध्यारो भएपछि आफैं विजुली बल्ने र उज्यालो भएपछि अटोमेटिक अफ हुने प्रविधि उनीहरूले विकास गरेका छन् । घरमा आरजिवि लाईट जडान गरेर घन्टै पिच्छे त्यसको कलर चेन्ज गर्ने व्यवस्था मिलाउन सकिने अर्का प्रोजेक्ट डेभलपर अभिषेकले बताए ।

पुल्चोक इन्जिनियरिङकै प्रबल लिगल, रुपेश प्रजापति, प्रदीप बज्राचार्य र प्रसुन श्रेष्ठले डेभलप गरेको होम अटोमेसन सिस्टममा मोबाइल वा कम्प्युटरमा रहेको वेव ब्राउजरबाटै घरायसी सामग्री नियन्त्रण गर्न सकिन्छ । त्यसका लागि इन्टरनेट र उनीहरूले विकास गरेको इथरनेट बेस होम अटोमेसन सिस्टम आवश्यक पर्छ । 'यस सिस्टममा इन्टरनेट ब्राउजर चलाउन सकिने जुनसुकै डिभाइसबाट घरायसी इलेक्टोनिक्स कन्ट्रोल गर्न सकिन्छ,' लिगलले भने । त्यही कलेजकै अविसा थापा मगर भने आवाजबाटै इलेक्टि्रोनिक्स डिभाइस कन्ट्रोल गर्न सकिने प्रोजेक्ट देखाउँदै थिइन । उनले हेडफोनमा भएको माइकबाट कुन बत्ति अन/अप गर्ने अर्डर गर्थिन, त्यसैअनुसार बत्ति निभ्ने/बल्ने गथ्र्यो । 'हाम्रो प्रोजेक्टले हिँडडुल गर्न नसक्ने अपाङ्ग, बुढाबुढीलाई विद्युतीय सामग्री कन्ट्रोल गर्न सघाउँछ,' उनले भनिन् । मगरले अनुप शाक्यसग मिलेर यस्तो प्रविधि विकास गरेकी हुन् ।

यी भए घरलाई स्मार्ट बनाउने इनोभेटिभ प्रविधि । यस्ता ३५ वटा प्रोजेक्ट मेलामा राखिएको मिडिया कोअर्डिनेटर गिरिश पाण्डेले जानकारी दिए । मेलामा त्यसबाहेक अरु २५ वटा फरक खालका प्रोजेक्ट थिए । पुल्चोक क्याम्पसकै रुची श्रेष्ठ, सतेन्द्र शाक्य, श्रेया बैद्य र सुभ्रतराम जोशीले डेभलप गरेको स्मार्ट सिकर मोवाइल एप्सले आफ्नो लेकेसन ट्रयाक गर्दै त्यहाँ रहेका बेला आवश्यक सामग्री नोट गरेर राख्न सकिने, आफ्ना साथीहरूको लोकेसन ट्राक गर्ने सुविधा दिन्छ । सोही कलेजकै संदीप उपाध्याय, राजन गौतम र जगदीश गौतमको स्मार्ट नोटवुकले पढ्ने विद्यार्थीदेखि लेखकसम्मलाई कहिल्यै कपी कलम प्रयोग गर्नै नपर्ने गरी ल्यापटप, डेस्कटप, ट्याब्लेटलाई स्मार्ट नोटबुकमा परिवर्तन गरिदिन्छ ।

आफूले पढ्दा हासिल गरेको ज्ञानलाई ब्यवहारमा उतारेर देखाउन पुल्चोक क्याम्पसका इलेक्ट्रोनिक्स, इलेक्ट्रीकल र कम्प्युटरका विद्यार्थीले हरेक बर्ष यस्तै मेला गर्दै आएका छन् । 'अव घरलाई स्मार्ट बनाउनु पर्छ भनेर यस बर्ष मेलाको थिम स्मार्ट होम राखिएको हो,' आयोजक कमिटीको मिडिया कोअर्डिनेटर पाण्डेले भने, 'प्रतिस्पर्धामा निकै उत्कृष्ट प्रोजेक्ट आए ।'  लगानीकर्ता आए नेपालमा विकास भएका प्रोजेक्टलाई व्यवसायीक उत्पादन गरेर हरेक घरलाई स्मार्ट बनाउन सकिने उनको अपेक्षा छ ।
source :-http://www.ekantipur.com/np/2071/3/14/full-story/391542.html

Skype मा बोल्दै गरेको Video कसरि Record गर्ने ??

 जानकारी शेयर गर्नुहोला स्काईपमा जथाभाबी गरेर भोलि तपाई हाम्रा आफ्नाहरुले पछुताउनु नपरोस |
आज मैले skype मा बोलेको बेलाको video record गर्ने उपाय लिएर आएको छु । कसरी गर्ने त record आउनुस् छोटो चर्चा गरौं । ‘Free Video Call Recorder for Skype ‘एउटा यस्तो free software हो जसको मद्दतबाट skype को video सजिलै record गर्न सकिन्छ ।



१. सबैभन्दा पहिले यो Software यहाँबाट Download गरी Install गर्नुहोस् ।
www.dvdvideosoft.com/products/dvd/Free-Video-Call-Recorder-for-Skype.htm

जब तपाईले Install गरीसकेर यो Program Launch गर्नुहुन्छ तब माथिको Screenshot मा जस्तै Window खुल्नेछ ।

२. यसबाट Skype Video Record गर्ने ३ वटा Mode हरू छन् ।
i. Picture in Picture(दुवैतिरको Audio & Video Record गर्न)

ii. Only Video Of Other Side (अर्को तिरको मात्र Audio & Video रेकर्ड गर्न)

iii. Only Audio(दुवैतिरको Audio मात्र Record गर्न)

३. अब कुन Mode मा Record गर्ने छानिसके पछि Record को Button मा Click गरेर Recording Start गर्न सक्नुहुनेछ । समाप्त भएपछि Stop Button मा Click गर्नुहोस ।

बानेश्वरमा १ रोपनी जग्गा आउने रकम तिरेर किनेको कम्प्युटरले के काम गथ्र्यो-प्रविधिः उहिले र अहिले

कम्प्युटर एसोसिएसन अफ नेपाल (क्यान) का सस्थापक अध्यक्ष विमल शर्माले पहिलो पटक ९० हजार रुपैया तिरेर कम्प्युटर किनेका थिए । त्यो २०४३ सालको कुरा थियो । 'त्यतिखेर त्यो रकमले बानेश्वरमा १ रोपनी जग्गा आउथ्यो, उनी सम्झन्छन् । बानेश्वरको जग्गाको भाउले आकाश छोएको छ । कम्प्युटरको भाउ भने घटेर केही हजारमा झरेको छ ।

उनले बानेश्वरमा १ रोपनी जग्गा आउने रकम तिरेर किनेको कम्प्युटरले के काम गथ्र्यो होला ? 'त्यस कम्प्युटरमा हार्ड डिस्कसमेत थिएन,' उनले सम्भिmने, 'हरेक पटक कम्प्युटर चलाउन प्रोग्राम इन्स्टल गर्नु पथ्र्यो ।' फ्लपी डिस्क हालेर लोड गर्नुपर्ने कम्प्युटरले उनलाई सडकको डिजाइन गर्न र रिपोर्ट राइटिङमा शर्मालाई ठूलो सहयोग गरेको थियो । उनी त्यतिखेर कन्सल्टेन्सी चलाउथे । कन्सल्टेन्सीका लागि भनेर उनले त्यतिखेर बेल्ट्रोनिक्सबाट त्यस्ता ५ वटा कम्प्युटर किनेका थिए । त्यतिखेरको कम्प्युटरबाट सीमित काम गर्न सकिन्थ्यो । त्यही सीमित काम गर्न पनि दक्ष जनशक्ति थिएन । 'वर्ड प्रोसेसिङ जानेकाले चार्ट बनाउन नजान्ने, लोटस चलाउनेले भाइरस लाग्ने समस्या समाधान गर्न नसक्ने,' उनले त्यतिखेरको जनशक्तिको क्षमताबारे प्रस्ट्याए, 'कम्प्युटरले गर्ने सीमित काम पनि पूर्ण रुपमा उपयोग गर्ने जनशक्ति थिएन ।'

त्यसैले उनीहरुले कम्प्युटर चलाउने दक्ष जनशक्ति उत्पादन गर्न उनीहरुले वर्ड प्रोसेसिङ, डाटाबेस, डस -डेस्कटप अपरेटिङ सिस्टम) र  भाइरस स्क्यानिङ गरी ४ वटा ज्ञानको प्याकेज कोर्ष बनाएर कम्प्युटर सिकाउन इन्स्िटच्युट संचालन गरे । 'यतिखेर यति कुरा जानेका ब्यक्ति कम्प्युटरमा पर्फेक्ट मानिन्थ्यो,' उनले त्यतिखेरको कम्प्युटर चलाउने जनशक्तिको ज्ञानको दायरा सम्भिm, 'टाइप राइटर युगबाट कम्प्युटर युगमा फड्को मार्ने काम निकै अनौठो थियो ।'

त्यतिखेरका लागि त्यति सीमित कुरा पनि निकै ठूलो फड्को मारेर आएको थियो । अहिलेको पुस्ताले त्यो कुरा सुन्दा पत्याउन गाह्रो मान्छ । उनले कम्प्युर स्टार्ट गर्न प्रयोग गर्ने फ्लपी डिस्क डाइनोसर जस्तै लोप भइसकेको छ । एमवी (मेगाबाइट) मा स्पेस पाइने फ्लपीको सट्टा त्यसको हजारौं गुणा क्षमता टिबी (टेराबाइट) का हार्ड डिस्क आएका छन् । कम्प्युटरको र्‍याम केही बाइटबाट बडेर जिवि (गिगाबाइट) मा पाइन थालेको छ । त्यतिखेरका कम्प्युटरको सिपियु (सेन्ट्रल प्रोसेसिङ युनिट) ४८६, पेन्टियम १-४, कोरटुड्यु हुदै आइ थ्री-आइ सेभेनसम्मका बजारमा आएका छन् । तिनको डाटा प्रोसेसिङ क्षमतासमेत हजारौं गुणा छिटो भएको छ ।

यो त भयो सामान्य डेस्कटप कम्प्युटरको कुरा । अहिले हरेक काम/क्षेत्रमा कम्प्युटरको प्रयोग हुन थालेको छ । राष्ट्रिय जनगणनाको डाटा प्रोसेसिङ गर्न २०२८ सालमा ल्याइएको कोठै ढाक्ने कम्प्युटरको तुलनामा त्यसभन्दा कैयौं बढी क्षमताले काम गर्ने काखे कम्प्युटर -ल्यापटप) आएको धेरै भइसक्यो । त्यसलाई विस्थापित गर्दैछन् हाते कम्प्युटर ट्याब्लेटले । विस्तारै ट्याब्लेटभन्दा सानो  मोवाइलको समेत सुविधा भएको फ्याब्लेटले पनि बजार पिटेको छ ।

हातमा बाध्ने घडीले समयमात्रै देखाउने दिन सकिएका छन् । स्मार्ट घडी नाम दिइएका यी यन्त्रले समयसगै कम्प्युटर/मोवाइले गर्ने हरेक काम गर्छन् । कुनै बेला क्यामेरामा फिल्म (रिल) हालेर फोटो खिचिन्थ्यो । त्यतिखेर कोनिका कोडाक, यासिकालगायतका कम्पनीका क्यामेरा निकै चल्तीमा थिए । रिलमा लाइट पर्न नहुने फोटो, उडी हाल्ने । फोटो खिची सेकपछि रिल अनलोड गरेपछि मात्र धुलाउन पाइने । रिललाई डेभलप गरेर नेगेटिभ तयार गरेपछि मात्र फोटो धुलाउन सकिने । डिजिटल प्रविधिले त्यसलाई विस्थापन गर्‍यो । चन्द्रमाको पहिलो तस्बिर खिच्ने कोडाक कम्पनी प्रविधिको विकासमा टिक्न नसकेर टाट उल्टियो । नेपालमा ५ बर्षअघि झण्डै साडे ३ सय कलरल्यावले फोटो धुलाउने मेसिन कौडीको भाउमा बेचे । कलर ल्याब एशोसिएसनका अनुसार प्रविधिमा आएको तीब्र परिवर्तनले गर्दा यस ब्यवसायमा भएको १ अर्बभन्दा बढी लगानी डुब्यो । ती क्यामेराको ठाउ डिजिटल क्यामेराले लिएका छन् । न रिल हाल्नुपर्ने, न नेगेटिभ निकालेर धुलाउनु पर्ने । मोवाइलमा समेत क्यामेरा हुने भएकाले फोटो खिचेपछि आफूलाई चाहिए अनुसार एडिट गरेर सिधै सामाजिक संजाल, कम्प्युटर, मोवाइलमार्फत आफन्तलाई देखाउन/शेयर गर्न सकिने ।

नेपालमा मोवाइल फोन सुरु भएको बेला (दशकअघि) नोकियाका ब्ल्याक एन्ड ह्वाइट सेट ७ हजार रुपैया हालेर किनेको सम्झना विराटनगरको झोराहाटका कृष्ण घिमिरेलाई ताजैछ । अहिले उनी सामसङको ग्यालेक्सी एस फोर चलाउछन् । उनले त्यतिखेर किनेको जस्तो नोकियाको सेट अहिले २ हजार रुपैयाभन्दा सस्तोमै आउछ । उनले करिव ७० हजार तिरेर किनेको ग्यालेक्सी एस फोरले उनको घरायसी, कार्यालय, ब्यवसायीक दैनिकीमा कम्प्युटरले जत्तिकै सघाउछ । मोवाइल उठाउदा पैसा तिर्नु पर्ने दिन फेरिएर फोन उठाउदा पैसा आउने (क्यासअनएड) सम्म आइपुगेको छ ।  प्रविधिले मूल्यलाई सस्त्याउदै गएको छ । हरेक डिभाइस नया सस्करण बजारमा आउदा मूल्य एक तिहाइले घट्ने क्यान सदस्य पवनकुमार शर्मा बताउछन् ।

नया पुस्ताले दशकअघि इन्टरनेट डायल अप प्रविधिले चलाइन्थ्यो भनेर पत्याउदैन । टेलिफोन र इन्टरनेट दुवैको पैसा तिरेर कछुवा गतिमा चलाइने इन्टरनेट अप्टिकल फाइबर प्रविधिमा प्रवेश गरेपछि निकै फास्ट भएको छ र सस्तो पनि । केही केविपिएसको गतिबाट प्राइस, प्रविधि र स्पिडमा इन्टरनेटले फड्को मारेको छ । हुने खानेले मात्र किन्न सक्ने इन्टरनेट हरेकको मोवाइलमा उपस्थित भएको छ ।

प्रविधिमा आएको परिवर्तनले त्यतिखेर धनीको ट्याटस सिम्बोल बताउने, अडियो/भिडियो क्यासेट, त्यसका प्लेयर, वाकमेन, भिसिआरको नामोनिसानै मेटियो । तिनको काम अहिले कम्प्युटर, मोवाइल, आइपडले लिएका छन् ।

पत्रिकाको कार्यालयमा सीमित भएका फ्याक्स मेसिनको उपयोग अहिले देखिएको छैन । कुनैबेला यसै मेसिनबाट कुनै काजजातको प्रतिलिपि अर्को ठाउमा पुर्‍याउनु अचम्मको कुरा थियो । इमेलमार्फत डकुमेन्ट फाइल, स्कयान, फोटो, पिडिएफलगायत सफ्टकपी ब्यक्तिगत खातामा पठाउन सकिने भएपछि सामुहिक फ्याक्स मेसिनमा आउने हार्डकपीको के काम ?

सुन्दै अचम्म लाग्ने कुरा अहिले हामी भोग्दै छौं । क्यानका सदस्य शर्मालाई एसएलसी सकेपछि उनका बाबु पुरुषोतमले २०४६ सालमा सिंगापुरबाट १ लाख ३० हजार रुपैया तिरेर ४८६ कम्प्युटर ल्याइदिएका थिए । अहिले उनको ८ कक्षामा पढ्ने छोरा प्रतीक आइप्याडमा गेम खेल्छन् । उनलाई गेम खेल्नकै लागि बनाइएको पिएसपी (प्ले स्टेसन पोर्टेबल) ले चित्त बुझेन रे ! 'अहिले आइटीमा ग्राजुएट गर्ने ब्यक्तिले पढेको ५ बर्षपछि प्रविधिमा सबै नया कुरा पाउछन्,' क्यानका सस्थापक अध्यक्ष शर्मा भन्छन्, 'त्यसैले कोही ब्यक्ति आइटीमा कहिल्यै पूर्ण हुन सक्दैन ।' प्रविधिको विकासले संसारलाई क्षणक्षणमा नया ग्याजेटसग साक्षात्कार गराउदैछ ।

प्रविधि क्षेत्रका विज्ञहरुको भबिष्यबाणी सुन्ने हो भने आगामी केही बर्षभित्रै प्रविधिमा अद्भूत परिवर्तन आउने छ । अर्को बर्ष विद्युतीय कागजको विकास हुनेछ । मोबाइल फोनमा ब्रोडब्यान्डकै स्पिडमा डाटा डाउन/अपलोड गर्ने गरी फोरजी सुविधा आउनेछ । त्यसको अर्को वर्ष टेराबाइड स्टोरेज क्षमताका मेमारी कार्ड उपलब्ध हुनेछन् । त्यसपछिका बर्षमा सूर्यको किरणले पार्ने असरबाट बच्ने सनस्त्रिmन पिलको आविस्कार हुनेछ । आगामी ८ बर्षभित्र घाउमा टाचा लगाउने लेजर पेन, सुपर हाइस्पिडमा डाटा ट्रान्सफर गर्ने लाइट पिक प्रविधि, फ्युजन रियाक्टरबाट उर्जा, कहिल्यै दुर्घटना नहुने क्र्यास प्रुफ कारको विकास हुनेछ । बाचिरहनु पर्छ, के के देख्न पाइने हो !

 

SOURCE http://www.ekantipur.com/np/2070/9/18/full-story/381766.html#sthash.5tH5GSOw.dpuf

 

 

 

एमआरपी (मेशीन रिडेवल राहदानी) सम्बन्धि जानकारी -राहदानी अब अनलाइनबाटै

मेशिन रिडेवल राहदानी भनेको यस्तो यात्रा अनुमतिपत्र हो जसको पहिचान राहदानी पृष्ठमा भएका विवरणहरु यन्त्रबाट पढ्न सकिने अन्तर्राष्ट्रिय नागरिक उड्डयन संगठन (ICAO) को मापदण्ड अनुरुपको राहदानी हो। एमआरपी अन्तर्राष्ट्रिय स्तरको राहदानी सुरक्षण विधिअनुरुप जारी भएको हो। यस राहदानीमा नेपाललाई अन्तर्राष्ट्रिय जगतमा परिचित गराउने खालका सुरक्षण चिन्हहरु प्रयोग गरीएका छन।


एमआरपी सुरक्षाको दृष्टिकोणबाट अन्तर्राष्ट्रिय मापदण्डअनुसारको सुविधायुक्त राहदानी भएकाले यात्रुहरुको यात्रामा सहजता प्रदान गर्दछ। यन्त्रबाट राहदानीमा भएका विवरण पढ्न सकिने भएकाले यो राहदानी बाहकलाई अन्तर्राष्ट्रिय सिमामा आवतजावत गर्दा छिटो छरितो रुपमा सुविधा उपलब्ध हुनेछ।

एमआरपीमा वाहकको फोटो र अन्य विवरण कम्प्यूटर प्रिन्ट गरी ल्यामिनेट गरिने हुनाले यो राहदानीको दुरुपयोग हुने सम्भावना धेरै कम छ। यसमा नाम, राहदानी नब्बर, राष्ट्रियता, जन्म मिति, लिङ्ग, राहदानीको म्याद समाप्त हुने मिति, व्यक्तिगत परिचयपत्र नम्बर उल्लेख गरिएको हुन्छ।

एमआरपीका लागि निवेदन दिँदा पेश गर्नु पर्ने कागजपत्रहरु

१ – रीतपूर्वक भरिएको दरखास्त फाराम २ प्रति

२ – नेपाली नागरिकताको प्रमाणपत्रको सक्कल प्रति र सोको एक प्रति प्रतिलिपि

३ – ६ महिनाभित्र खिचेको तल उल्लिखित विवरणअनुसारको रङ्गीन फोटो २ प्रति

४ – राहदानी दस्तूर: अमेरिकी डलर १५० बराबरकोसम्बन्धित देशको मुद्रा

नाबालिगको हकमा सम्बन्धित जिल्ला प्रशासन कार्यालयबाट जारी गरिएको नाबालिग परिचय पत्र र निजको बाबु वा आमामध्ये कुनै एक जनाको नागरिकताको प्रमाण पत्र र सोको प्रतिलिपि। संरक्षक नियुक्त भएकोमा संरक्षक भएको ब्यहोरा खुल्ने लिखतको सक्कल प्रति र संरक्षकको नागरिकताको प्रमाणपत्र तथा त्यसको प्रतिलिपि।

एमआरपीका लागि संलग्न गर्नु पर्ने फोटोको विवरण

१ – फोटोः ६ महिना भित्र खिचेको रंगिन

२ – आकारः ४५ मि.मी. ह ३५ मि.मी. (४.५ से.मी. ह ३.५ से.मी.)

३ – पृष्ठभूमिः सादा र हलुका रंग

४ – अवस्थिति(Pose) : पूर्ण रुपमा अगाडि फर्केको, दुवै कान देखिने, आंखाले क्यामेरा हेरेको, टाउको पूरा र काँधको केही भाग देखिने, छायां (Shadow) नदेखिने, रातो आंखा (Red eye) नभएको, साथमा अरु व्यक्ति नभएको, मुख बन्द भएको, चहकिलो रंगको लुगा नलगाएको

५ – स्वरुप (Image) को स्थिति अनुहारले ७० देखि ८० प्रतिशतसम्म फोटो ढाकेको।

६ – गुणस्तर प्रष्ट (Sharp focused), उच्च गुणस्तरको, नखुम्चिएको, मसी वा दाग धब्बा नलागेको, स्तरीय कागजमा तथा उच्च Resolution मा छापिएको।

७ – चश्मा प्रयोग गर्नु पर्ने भएमा : आंखा प्रष्ट देखिने, मसिनो फ्रेममा, प्रकाश परावर्तन (Reflection) नभएको तथा शिशा रंगीन नभएको

८ – शिरपोश : विशेष धार्मिक, सांस्कृतिक एवं स्वास्थ्य सम्वन्धी कारण वाहेक टाउको खुला हुनुपर्ने।

राहदानीको निवेदन फाराम भर्ने तरिका

(क) फारामको शिरमा राहदानीको लागि जुन कार्यालयमा निवेदन पेश गरिएको हो सो कार्यालयको नाम उल्लेख गर्नुपर्नेछ।

ख) राहदानी अङ्ग्रेजी भाषामा तयार गरिने हुनाले राहदानी माग गर्ने निवेदकले तोकिएबमोजिमको फाराम सकेसम्म टाइप गरी पेश गर्नु पर्नेछ। टाइप गर्न संभव नभएमा गाढा कालो मसिले बुझिने गरी फाराममा माग गरिएको सबै सूचना दिने गरी फाराम भर्नु पर्नेछ। फाराम भर्दा एक कोठा भित्र एक अक्षर मात्र पर्ने गरी सफा र शुद्धसँग अङ्गे्रजी ठूलो अक्षरमा भर्नुपर्नेछ। यदि स्पेस दिनु परेमा सो को लागि एक कोठा खाली छाड्नुपर्नेछ।

(ग) निवेदकको नाम, थर तथा ठेगानालाई अङ्ग्रेजी भाषामा लेख्दा हिज्जे फरक पर्न सक्ने हुँदा पुरानो राहदानी भएमा सो अनुसार र शैक्षिक योग्यताको प्रमाणपत्रमा उल्लिखित हिज्जेलाई ध्यान दिनुपर्नेछ।

(घ) राहदानीको निवेदन फाराममा १७ खण्डहरु रहेका छन। ती खण्डहरुलाई निम्नानुसार क्रमैसँग भर्नुपर्नेछ। फाराममा ८ चिन्ह दिइएका खण्डहरु अनिवार्य रुपमा भर्नुपर्नेछ।

(१) थर (Surname) भर्दा निवेदकको नागरिकताको प्रमाणपत्रमा उल्लिखित थर लेख्नुपर्नेछ।

(२) नाम (Given Name) भर्दा निवेदकको नागरिकताको प्रमाणपत्रमा उल्लेख भएको नामको पहिलो र बीचको नाम लेख्नु पर्नेछ। उदाहरणका लागिः

पूरा नाम कृष्ण बहादुर थापा भएका निवेदकले थरमा Thapa र नाममा Krishna Bahadur लेख्नुपर्नेछ।

बिवाहित महिलालेआफ्नो माइती र पति दुवैको थर लेख्न चाहेमा त्यसो गर्न सकिनेछ। जस्तैः गीता कुमारी गौतम खनाल पूरा नाम भएकी निवेदकले थरमा Gautam Khanal नाममा Gita Kumari लेख्नु पर्नेछ। त्यस्तोमा विवाह दर्ताको प्रमाणपत्र पेश गर्नुपर्नेछ।

बिवाहित महिलाले आफ्नो माइती तर्फो मात्र थर लेख्न चाहेमा त्यसो गर्न सकिनेछ। तर पति तर्फो थर राख्न चाहेमा विवाह दर्ताको प्रमाणपत्र पेश गर्नुपर्नेछ ।

(३) जन्मस्थान (Place of Birth) सम्बन्धी खण्ड भर्दा निवेदकको नागरिकताको प्रमाणपत्रमा उल्लिखित जन्मस्थानको जिल्ला भर्नुपर्नेछ।

(४) राष्ट्रियता (Nationality) सम्बन्धी खण्ड भर्दा अङ्ग्रेजीमा NEPALESE भर्नु पर्नेछ।

५) (क) जन्ममिति (Date of Birt h) खण्ड भर्दा निवेदकले नागरिकताको प्रमाणपत्रमा उल्लिखित जन्ममिति बिक्रम सम्वतमा र त्यसलाई रुपान्तरण गरी इश्वी सम्वतमा समेत लेख्नु पर्नेछ।

विक्रम सम्वतबाट इश्वी सम्वतमा रुपान्तरण गर्दा ७ दिन सम्मको फरक परेमा सो को पुष्ट्याइ गर्ने प्रमाण पेश गरेमा सो बमोजिमको जन्ममिति राहदानीमा उल्लेख गर्न सकिनेछ। बिक्रम सम्वतबाट इश्वी सम्बतमा जन्ममिति रुपान्तरण गर्दा ३ दिन सम्म फरक परेमा त्यसको पुष्ट्याइ गर्ने थप प्रमाण पेश गर्नु पर्नेछैन।

माथिखण्ड (क) को अधिनमा रही जन्म मिति भर्दा S.L.C. वा सो भन्दा माथिको शैक्षिक प्रमाणपत्रमा उल्लिखित जन्म मिति र पहिले राहदानी लिइ सकेको भए त्यसमा उल्लिखित जन्म मितिलाई ध्यान दिनु पर्नेछ।

(६) लिङ्ग (Sex) खण्ड भर्दा निवेदकको नागरिकताको प्रमाणपत्रमा उल्लिखित लिङ्ग भर्नु पर्नेछ।

(७) नागरिकता वा अनुमति नं. (Citizenship or Permit No.) सम्बन्धी खण्ड भर्दा निवेदकको नागरिकताको प्रमाणपत्रको नम्बर भर्नुपर्नेछ।

(८) जारीमिति (Date of Issue) मा नागरिकताको प्रमाणपत्र जारी भएको मिति उल्लेख गर्नुपर्नेछ।

(९) जारी भएको स्थान (Place of Issue) मा नागरिकताको प्रमाणपत्र जारी भएको जिल्लाको नाम लेख्नुपर्नेछ।

(१०) पूरानो राहदानी वा यात्रा अनुमतिपत्र नं (Old Passport or Travel Document No.) सम्बन्धी खण्ड भर्दा पहिले राहदानी लिएको भए उक्त राहदानीको नम्बर, पहिले एक भन्दा बढी राहदानी लिएको भएमा पछिल्लो राहदानीको नम्बर उल्लेख गर्नुपर्नेछ।

१०A) जारी भएको मिति (Date of issue) सम्बन्धी खण्ड भर्दा पूरानो राहदानी वा यात्रा अनुमति पत्र जारी भएको मिति उल्लेख गर्नुपर्नेछ।

(१०B) जारी भएको स्थान (Place of Issue) (११) ठेगाना (Address) सम्बन्धी खण्ड भर्दा पूरानो राहदानी वा यात्रा अनुमतिपत्र जारी भएको ठाउँ उल्लेख गर्नुपर्नेछ।

(११A-E) ११A देखि E सम्मका खण्ड भर्दा निवेदकको स्थायी ठेगाना भएको जिल्ला, नगरपालिका वा गा.वि.स., वडा नम्बर, टोल वा गाउँको नाम र घर नम्बररब्लक नम्बर भएमा सो समेत क्रमैसँग लेख्नुपर्नेछ। घर नम्बररब्लक नम्बर नहुनेले घर नम्बरको ठाउँ खाली छाड्न सकिनेछ।

(१२) इमेल (E-mail) सम्बन्धी खण्डमा निवेदकको सम्पर्क इमेल ठेगाना भएमा प्रष्टसँग उल्लेख गर्नुपर्नेछ।

१३) फोन नं. (Phone No.) सम्बन्धी खण्डमा निवेदकको फोन नं. भएमा प्रष्टसँग उल्लेख गर्नुपर्नेछ। आफ्नो फोन नभएमा परिवारका सदस्य वा नजिकका चिनजानका व्यक्तिको नम्बर दिन सकिनेछ।

(१४) आपत परेमा खबर गर्ने निकटतम व्यक्तिको ( Next of Kin) खण्डमा निवेदक विदेशमा छँदा कुनै संकट परेमा खबर गर्न सकिने निवेदकको परिवारको सदस्य वा आफन्त वा मित्रको नाम र ठेगाना भर्नुपर्नेछ।

(१४A-G) १४A देखि १४G सम्मका खण्डमा निवेदक विदेशमा छँदा आपत परेमा खबर गर्ने व्यक्तिको पूरा नाम थर, ठेगाना, जिल्ला, गा.वि.स.रन.पा., वडा नं., टोलरगाँउ, घर नम्बर, समेत क्रमैसँग भर्नुपर्नेछ।

(१५) नाता (Relationship) सम्बन्धी खण्डमा आपत परेको बेलामा खबर गर्नुपर्ने व्यक्तिसँग निवेदकको के नाता पर्छ सो उल्लेख गर्नुपर्नेछ।

(१६) फोन नं.(Phone No.) सम्बन्धी खण्डमा आपत परेमा खबर गर्नुपर्ने व्यक्तिको फोन नम्बर भएमा सो लेख्नुपर्नेछ।

(१७) इमेल (E-mail) सम्बन्धी खण्डमा आपत परेमा खबर गर्नुपर्ने व्यक्तिको इमेल भएमा सो प्रष्टसँग लेख्नुपर्नेछ।

(१८) फारामको अन्त्यमा निवेदकको दायाँ र बायाँ बुढी औंलाको छाप प्रष्टसँग लगाउनुपर्नेछ। निवेदक को स ही (A pplicant’s Signature) सम्बन्धी कोठामा निवेदकले पूरा हस्ताक्षर गर्नुपर्नेछ। उक्त हस्ताक्षर डिजिटल प्रविधिबाट निवेदकको राहदानीमा राख्नुपर्ने हुँदा हस्ताक्षर पूरा र प्रष्ट नभएमा निवेदक स्वयं जिम्मेवार हुनुपर्नेछ। निरक्षर भएमा हस्ताक्षर गर्नुपर्ने बक्समा × चिन्ह लगाउनु पर्नेछ।

विदेशमा वसेका नेपालीले कसरी लिने एमआरपी ?

१. विदेशमा बसोबास गरिरहेका नेपाली नागरिकले राहदानीको लागि नजिकको नेपाली नियोगमा निवेदन दिन सक्नेछन् ।

२. दफा (१) बमोजिम प्राप्त भएका निवेदनहरुलाई नियोगले नागरिकताको प्रमाणपत्रको सक्कल वा पूरानो राहदानीसँग भिडाइ निवेदकले भरेको फाराम नियमावली तथा यस निर्देशिका बमोजिम पूर्ण, प्रष्ट र बुझिने गरी भरे नभरेको रुजू गरी, रीत नपुगेको भएमा रीत पुर्‍याउन लगाउनुपर्नेछ।

३. नियमबमोजिम नयाँ राहदानी लिनुपर्दा वा म्याद समाप्त नभएको हस्तलिखित राहदानी बुझाइ मेसिन रिडेवल राहदानी लिन नियोगमा निवेदन दिँदा पूरानो राहदानीको सक्कलको अतिरिक्त नियोगको सम्बन्धित अधिकारीले निवेदकको नागरिकताको सक्कल प्रति पेश गर्न लगाउन सक्नेछ। त्यस्तो अवस्थामा आवश्यक देखिएमा उक्त नागरिकताको सत्यताबारे सम्बन्धित निकायबाट यकिन भएपछि मात्र राहदानी निवेदन उपर कारवाही अगाडि बढाउन सकिनेछ।

४. रीत पूर्वक प्राप्त निवेदनमा नियमावलीले तोकेबमोजिमको राजश्व बुझी एक प्रति रसिदरभौचर निवेदकलाई दिने, दोस्रो प्रति निवेदन फाराम साथ संलग्न राखी कार्यालयमा पठाउने र तेस्रो प्रति नियोगको फाइल अभिलेखमा राख्नुपर्नेछ।

५. दफा (२), (३) र (४) तथा नियमावलीको नियम ७ बमोजिम नियोग समक्ष परेको निवेदन फाराम साथ प्राप्त कागजात छानविन गर्दा राहदानी जारी गर्न मनासिव देखेमा सो को अभिलेख राखी फाराममा उल्लिखित विवरण प्रमाणित गरी सिफारिस सहित एक प्रति सक्कल निवेदन तोकिएबमोजिमको फोटो २ प्रति तथा निवेदन फाराम साथ संलग्न कागजपत्रको प्रमाणित प्रतिलिपि कूटनीतिक थैली मार्फत कार्यालयमा पठाउनुपर्नेछ।

६. दफा (२) वा (५) बमोजिम प्राप्त राहदानीको निवेदन उपर छानबिन गर्दा आवश्यक कागजात पर्याप्त नभएकोले निवेदकलाई राहदानी जारी गर्न उपयुक्त नहुने भएमा सो को जानकारी नियोगले निवेदकलाई निवेदन दर्ता गर्दाकै बखत दिनुपर्नेछ। निवेदन साथ आवश्यक कागजपत्र पेश नगरेको अवस्थामा निवेदकलाई चाहिने कागजपत्र पेश गर्न लगाउनुपर्नेछ।

७. नियोगले दफा (४) बमोजिम सिफारिस सहित निवेदन तथा कागजातहरु कार्यालयमा पठाउँदा राहदानीको लागि परेका निवेदन उपर छानविन समाप्त भएको मितिले सामान्यतया एक हप्ता भित्र पठाइसक्नु पर्नेछ। पठाउने समय तालिका नियोगमा प्राप्त निवेदन संख्या, उपलब्ध उडान तालिका समेतलाई ध्यानमा राखी नियोग स्वयंले निर्धारण गरेबमोजिम हुनेछ।

८. माथि उल्लेख गरेबमोजिम नियोगहरु मार्फत प्राप्त हुन आएका निवेदन उपर कार्यालयले मेशिन रिडेवल राहदानी तयार गरी कूटनीतिक थैली मार्फत सम्बन्धित नियोगमा पठाउनेछ। त्यसरी प्राप्त भएका राहदानीहरुमा नियोगको सम्बन्धित अधिकारीले जारी गर्ने अधिकारीको रुपमा आवश्यक दस्तखत गरी निवेदकलाई राहदानी जारी गरी भरपाइ फाइल संलग्न राख्नुपर्नेछ।

९. नियमावलीको नियम ११ को उपनियम (२) बमोजिम निवेदकले कार्यालयबाट नै राहदानी बुझिलिन चाहेमा निवेदकको पहिचान हुने विवरणको प्रतिलिपि लिई सम्बन्धित निवेदकलाई कार्यालयबाट राहदानी प्रदान गर्न सकिनेछ।

१०. केन्द्रीय राहदानी कार्यालय र नियोगहरु बीच नेटवर्किङ गरी विद्युतीय माध्यमबाट राहदानी निवेदन फाराम तथा अन्य सूचनाहरु संकलन गर्ने कार्य प्रारम्भ भएपछि त्यसको जानकारी सरोकारवाला सबैलाई दिइनेछ। विद्युतीय माध्यमबाट राहदानी निवेदन फाराम संकलन गर्ने सम्बन्धी कार्यविधि पछि तोकिएबमोजिम हुनेछ।

द्रुत सेवा सम्बन्धी व्यवस्था

१. निवेदकले उचित कारण उल्लेख गरी द्रुत सेवा मार्फत राहदानी पाउन सो को पुष्ट्याइँ हुने कागजपत्र समेत राखी दोब्बर दस्तूर तिरी निवेदन दिएमा कार्यालयले ७ कार्यदिन भित्र द्रुत सेवा मार्फत साधारण राहदानी जारी गर्न सक्नेछ।

२. निवेदकले पेश गरेको कागजपत्रका आधारमा द्रुत सेवा मार्फत राहदानी जारी गर्न सकिने वा नसकिने सम्बन्धित राहदानी अधिकृतले यकिन गर्नेछ।

३. खण्ड (१) बमोजिमको निवेदन साथ पेश गरेको कागजपत्रको आधिकारिकता सम्बन्धित निकायबाट छानबिन गराउँदा अन्यथा प्रमाणित भएमा वा छानबिन गर्न ३ दिन भन्दा बढी समय लाग्ने अवस्थामा निवेदकलाई द्रुत सेवा मार्फत राहदानी जारी गर्न सकिनेछैन।

४. द्रुत सेवा मार्फत राहदानी प्राप्त गर्न पेश भएका निवेदनहरुको छुट्टै लगत राखी राहदानी जारी गरिनेछ।

५. द्रुत सेवा मार्फत राहदानी पाउनका लागि कन्द्रीय राहदानी कार्यालयमा मात्र निवेदन दिन सकिनेछ।

राहदानी हराएमा के गर्ने?

१. राहदानी हराएको कारणले नयाँ राहदानी लिनुपर्दा माथि उल्लिखित कागजातको अतिरिक्त निम्नबमोजिमका कागजात समेत संलग्न गर्नुपर्नेछ :

(क) राहदानी हराएको पुष्टि हुनेगरी स्थानीय प्रहरी कार्यालयले दिएको प्रतिवेदन,
(ख) हराएको राहदानी खोजतलासका लागि राष्ट्रिय पत्रिकामा प्रकाशित सूचना,

३. राहदानी हराएको कारण नयाँ राहदानी जारी गर्नु पूर्व हराएको राहदानीको नम्बर र जसको नाममा राहदानी जारी गरिएको हो सोको सूचना नेपाल प्रहरी, नेपालस्थित इन्टरपोलको कार्यालय, अध्यागमन कार्यालय तथा नेपालस्थित विदेशी नियोगलाई दिएपछि मात्र नयाँ राहदानी जारी गर्न सकिनेछ।

३. राहदानी हराएको अवस्थामा राष्ट्रिय पत्रिकामा सूचना प्रकाशन भएको मितिले ७ दिन पछि मात्र नयाँ राहदानीको लागि निवेदन दिन सकिनेछ। तर विदेशमा राहदानी हराई नियोग समक्ष नयाँ राहदानीका लागि निवेदन दिंदा यस दफाबमोजिम राष्ट्रिय पत्रिकामा सूचना प्रकाशन गर्नुपर्ने छैन।

४. हराएको राहदानीको हकमा दोब्बर दस्तुर लाग्नेछ।




राहदानी अब अनलाइनबाटै
राहदानी लिन अब लाममा बस्नुपर्ने छैन। राहदानी विभागले गर्न लागेको नयाँ व्यवस्थाअनुसार अनलाइनबाटै समय लिएर फाराम बुझाउने अनि राहदानी लिने मिति र समय लिनुपर्नेछ। विभागले राहदानीका लागि आवेदन फाराम बुझाउन 'अनलाइन' बाट समय लिनुपर्ने व्यवस्था एक महिनाभित्रै गर्न लागेको छ।
राहदानी विभागका महानिर्देशक रमेश खनालका अनुसार अनलाइनबाट फाराम भरेर बुझाउन मिति र समय लिनुपर्नेछ। 'यस्तो व्यवस्था भएपछि नागरिकले राहदानी फाराम बुझाउन र लिन लाममा बस्नुपर्ने छैन', उनले भने, 'तोकिएको मिति र समयमा फाराम बुझाएर लिन सकिनेछ। यो योजना माघभित्रै लागू हुनेछ।'
अनलाइनबाट समय लिएपछि मात्र विभागमा गएर फाराम बुझाउन सकिनेछ। फाराम बुझाएपछि विभागले तोकेको दिन र समयमा राहदानी प्रदान गर्नेछ। नयाँ व्यवस्था लागू भएपछि विभागमा अहिले राहदानीका लागि फाराम बुझाउन र लिन लाग्ने गरेको भीड अन्त्य हुनेछ। राहदानीका लागि विभागमा फाराम बुझाउन दिनहुँ नौ हजारजनाको लाम लाग्ने गरेको छ।
तर दैनिक बढीमा चार हजार फाराम बुझ्ने गरिएको छ। यो अघिल्लो साताको अभिलेख हो। खनालले भने, 'भीड कम गर्न र सेवाग्राहीलाई सुविधा होस् भनेर अनलाइनबाट समय लिएर फाराम बुझाउने व्यवस्था गर्न लागिएको हो। यसका लागि प्रक्रिया अघि बढिसकेको छ। कार्यान्वयनमा जान मन्त्रालयको निर्देशन कुरिरहेका छौं।'
अहिले फाराम भरेपछि बुझाउन टोकन लिएर विभागको क्षेत्रभित्र पस्नुपर्ने हुनाले सेवाग्राही बिहान तीन बजेदेखि नै लाम बस्ने गरेका छन्। कतिपय त विभागबाहिर रातभर बस्ने गरेका पनि छन्। अनलाइनबाट फाराम बुझ्ने र बुझाउने समय तोकिएपछि अहिलेको झन्झटबाट मुक्ति मिल्नेछ। विभागले सुविधाका लागि टोकन दिने गरे पनि त्यो लिन पनि भीड लाग्ने गरेको छ।
२०७२ मंसिरदेखि हस्तलिखित राहदानीलाई विश्वका कुनै पनि मुलुकले मान्यता दिने छैनन्। यसले गर्दा पनि मेसिन रिडेबल राहदानी (एमआरपी) लिनेको संख्या बढ्दै गएको छ। अहिले जिल्लामा दैनिक एक हजार पाँच सय, विदेशस्थित विभिन्न ३२ मिसनमा पाँच सयदेखि एक हजार र विभागमा चार हजार आवेदन पर्ने गरेका छन्।
विभागले दैनिक बढीमा चार हजारमात्र राहदानी दिन सक्छ। 'इन्कजेट' प्रविधि प्रयोग गरेपछि विभागले दैनिक ६ हजारभन्दा बढी राहदानी उत्पादन गर्नेछ। त्यसका लागि एमआरपी छपाइ गर्दै आएको फ्रान्सेली कम्पनी सहमत भएको पनि विभागले जनाएको छ।
source: annapurna post.